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चिकित्सा शिक्षा, भारतीय भाषाएँ, भारतीय ज्ञान-स्रोत और भारत का वर्तमान परिदृश्य

चिकित्सा शिक्षा, भारतीय भाषाएँ, भारतीय ज्ञान-स्रोत और भारत का वर्तमान परिदृश्य प्रस्तुति : वृषभ प्रसाद जैन “चिकित्सा शिक्षा, भारतीय भाषाएँ, भारतीय ज्ञान-स्रोत और भारत का परिदृश्य” विषय की चुनौतियाँ बहुत लंबे समय से सामने आ रही थीं और उन पर काम करने का मन भी बन रहा था, क्योंकि उसकी आवश्यकता इस विषय पर काम करने के लिए बार-बार प्रेरित कर रही थी। भारतीय चिकित्सा के ज्ञान-स्रोतों को लेकर पश्चिम दिनोंदिन और सजग होकर काम करने की ओर आगे बढ़ रहा है एवं काम कर रहा है और उससे वह अर्थ-संग्रह व अपनी अर्थ-समृद्धि भी बढ़-चढ़कर कर रहा है, पर हम अभी भी वेसुध से पड़े हैं। चिकित्सा शिक्षा के विविध क्षेत्रों यथा— चिकित्सकीय शिक्षा व औषधि विज्ञान एवं कला (फ़ार्मेसी) की शिक्षा, फिजियोथैरेपी एवं नर्सिंग आदि में जिस तरह परस्पर पूरकता का भाव होना चाहिए था, वह नहीं दिख रहा है। भारत में प्रचलित विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों यथा— एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेदिक, यूनानी एवं तिब्बती आदि में भी परस्पर जिस तरह का संवाद होना चाहिए था, वह नहीं हो रहा है और जिस तरह का लाभ भारत की जनता को मिल...